जानिए सीएससी ने कैसे बदली छत्तीसगढ़ के महासमंद इलाके में विकास की तस्वीर

जानिए सीएससी ने कैसे बदली छत्तीसगढ़ के महासमंद इलाके में विकास की तस्वीर

29 साल के वीएलई रत्न सागर अग्रवाल छत्तीसगढ़ के महासमंद में अपना सीएससी सेंटर चलाते हैं. उनका साल भर का ट्रांजेक्शन 5 करोड़ रु. से अधिक है. उन्होंने केंद्र पर 25 युवाओं को रोजगार दिया है और 100 लोगों को रोजगार देने का लक्ष्य रखते हैं. लेकिन यहां तक पहुंचने का उनका सफर उतार-चढ़ाव से भरा हुआ और काफी प्रेरणादायी रहा है.  

12वीं के बाद आगे की पढ़ाई के लिए रत्न सागर को देहरादून स्थित इंजीनियरिंग कॉलेज भेज दिया गया। एक दिन हॉस्टल में आईपीएल मैच देखने के दौरान उन्हें खबर मिली कि पिता जी को दिल का दौरा पड़ा है और वे घर आ गए. चूंकि वो माता-पिता के इकलौती संतान हैं, इसलिए घर की देखभाल के लिए उन्होंने अपनी इंजीनियरिंग की पढ़ाई छोड़ दी. घर पर रहते हुए ही उन्होंने रायपुर के पंडित रविशंकर शुक्ला विश्वविद्यालय से बीसीए की पढ़ाई पूरी की.

उन्हें सरकारी नौकरी में कोई दिलचस्पी नहीं थी। साल 2012 में अखबार में च्वायस सेंटर का विज्ञापन देखकर उन्होंने इसके लिए अप्लाई किया और फिर शुरू हुई इनकी सीएससी यात्रा.

महासमंद में ग्रामीणों का जीवन उनके रोजाना के काम के इर्द-गिर्द घूमता था। हालाँकि, सीएससी की ओर से दी गई डिजिटल साक्षरता के प्रशिक्षण  ने उनके जीवन को बदल दिया है। उन्होंने डिजिटल उपकरणों और इंटरनेट सेवाओं की मदद से अपने दूसरे कामों में तकनीकी का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। यहां के निवासी अब बिल भुगतान और अन्य लेनदेन करने के लिए डिजिटल भुगतान गेटवे का उपयोग करते है। वीएलई रत्ना सागर ने अभी तक 2000 से अधिक नागरिकों को डिजिटल साक्षरता का प्रशिक्षण दिया है. इनमें से 5 लोगों ने यहां के दूर दराज के गांवों में जाकर अपने सीएससी खोल लिए हैं.

फाइनेंसियल इन्क्लूजन में वीएलई रत्न सागर का काम अभूतपूर्व रहा है । वह डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के तहत विभन्न बैंको के लिए बैंकिंग संवाददाता (बीसी) हैं । उन्होंने महासमंद में नागरिकों के लगभग 800 खाते भी बनाए हैं। मुख्य रूप से: किसान, मजदूर, बुजुर्ग पेंशनभोगी, छोटे व्यापारी, जिनके पास बैंकिंग सुविधाओं की कमी है, अक्सर दिन-प्रतिदिन के लेनदेन के लिए उनसे संपर्क करते हैं। बीसी के रूप में उनका प्रतिदिन का लेन-देन 3 लाख रुपये है।

रत्न सागर की सीएससी ने साल 2016-17 में राज्य कृषि विभाग के लिए 70,000 से अधिक किसानों से सॉयल हेल्थ कॉर्ड प्रिंट किए हैं. वीएलई रत्ना और उनकी टीम ने 1500 इलेक्ट्रिक पोल्स की जिओ टैगिंग की है. वीएलई ने 20,000 की संख्या में मतदाता पहचान पत्र बनाएं है और तकरीबन इतनी ही संख्या में जन्म, मृत्यु और आय प्रमाण पत्र भी बनाए हैं.

गाँव के लिए उनकी आगे की योजना के बारे में पूछने पर रत्ना ने बताया, “अभी भी इस इलाके में पलायन की समस्या है। लोग यहां से शहर तो जाते हैं पर शहर से लौटकर गाँव कोई नहीं आता। इसलिए हमारा ध्यान अब गाँव में ही रोजगार की संभावनाएं उत्पन्न करना है।”

शिक्षा के क्षेत्र में टेक्नोलॉजी का सही उपयोग कैसे किया जाए, ये रत्ना के सीएससी से सीखा जा सकता है। जिन नागरिकों को सरकारी सेवाएं आसानी से नसीब नहीं होती थी, वे भी आज अच्छे और सुनहरे भविष्य के सपने देख रहे हैं।

बकौल वीएलई रत्न: “सीएससी में सेवाओं की गुणवत्ता ने महासमंद में लोगों के जीवन को बहुत बदल दिया है। इसके अलावा, ग्रामीणों को उनकी सेवाओं से लाभ हुआ है क्योंकि उन्हें उनके दरवाजे पर उचित लागत पर सेवाएं प्रदान की जाती हैं, विशेष रूप से अनपढ़, गरीब और वरिष्ठ नागरिकों के लिए बैंकिंग सेवाओं, डिजिटल साक्षरता और जीटूसी सेवाओं में। रत्ना कहते हैं, ” मुझे अपने डिजिटल इंडिया केंद्र में आने वाले ग्रामीणों के चेहरे पर खुशी देखकर बहुत संतोष होता है। यह एक ऐसा महान मंच है जिसके द्वारा व्यक्ति धन सम्मान कमा सकता है।”

वीएलई ने उठाया बदलाव का बीड़ा

वीएलई रत्न सागर छत्तीसगढ़ के दूर दराज के इलाके में बड़ी लगन से लोगों की सेवा कर रहे हैं। आज देश में जो तस्वीर महासमंद की बनी है ये उन्हीं के प्रयासों से मुमकिन हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है किरत्ना सागर जैसे वीएलई की ये कोशिशें देश के दूर दराज के इलाकों से पलायन रोकने के साथ साथ रिवर्स माइग्रेशन के लिए मील का पत्थर साबित होगी। वीएलई रत्ना सागर जैसे सैकड़ों वीएलई के बुलंद हौसलों ने छत्तीसगढ़ के दूर दराज के इलाकों में आज तरक्की की एक नई ईबादत लिख दी है।  

2 Responses to "जानिए सीएससी ने कैसे बदली छत्तीसगढ़ के महासमंद इलाके में विकास की तस्वीर"

  1. Hemant Batham   February 19, 2020 at 7:34 pm

    Very beautiful

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  2. Ashok Kumar Sharma   March 3, 2020 at 3:56 pm

    Very good. CSC is future of the nation.

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