महाराष्ट्र के कोंकण इलाके में सीएससी वाई फाई चौपाल बना युवाओं के लिए वरदान

महाराष्ट्र के कोंकण इलाके में सीएससी वाई फाई चौपाल बना युवाओं के लिए वरदान

18 साल की स्वपनाली सुतार के माता- पिता महाराष्ट्र के कणकवली तालुका के दरिस्ते गांव (सिंधुदुर्ग जिला) में खेती करते हैं. घर की माली हालत ठीक नहीं हैं. परिवार की आर्थिक चुनौतियों के बाद भी स्वपनाली पढ़ाई में काफी होनहार हैं और मुंबई के वेटनरी कॉलेज में ग्रेजुएशन कर रहीं हैं. लॉकडाउन के दौरान कॉलेज के सभी छात्र अपने घर लौट चुके हैं और वहीं से उनकी ऑनलाइन पढ़ाई चल रही है.

 लेकिन स्वपनाली के लिए ऑनलाइन पढ़ाई कोरोनावायरस महामारी के दौरान किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है. उनका गांव कोंकण क्षेत्र का एक बहुत ही पिछड़ा इलाका है जहां पर इंटरनेट का कोई नामोनिशान नहीं है. अपने किसी परिचित से मोबाइल फोन उधार लेकर उन्होंने ऑनलाइन पढ़ाई शुरू की लेकिन दूरदराज इलाका होने की वजह से नेटवर्क बड़ी मुश्किल से आ पाता था. नेटवर्क के लिए उनको पहाड़ के ऊंचे शिखर पर जाना पड़ता. इतना ही नहीं मानसून शुरू होने के बाद तो ये भी संभव नहीं था. तेज बारिश में पहाड़ पर जाना खतरनाक भी था.

सीएससी टीम के साथ स्वपनाली

 स्वपनाली के बारे में जानकारी मिलते ही सीएससी की महाराष्ट्र टीम हरकत में आ गई और रात दिन एक करके इस दुर्गम पहाड़ी इलाके में स्वपनाली के घर एफटीटीएच कनेक्शन प्रदान किया. आज स्वपनाली इंटरनेट की तेज स्पीड के साथ अपनी पढ़ाई मन लगाकर कर रही हैं.

न केवल स्वपनाली बल्कि ऐसे सैकड़ों युवा कणकवली तालुका के इस कोंकण क्षेत्र में जीवन में पहली बार इंटरनेट का अनुभव कर रहे हैं. यहां इंटरनेट कनेक्शन सीएससी वाई-फाई चौपाल के तहत संचालित किया जा रहा है. यह क्षेत्र भौगोलिक रूप से एक दुर्गम इलाका है. इसकी भौगोलिक अलगाव के कारण, आर्थिक प्रगति ना के बराबर है. सीएससी वाई-फाई चौपाल के माध्यम से इंटरनेट को इस अलग-थलग क्षेत्र में लाना एक बड़ी उपलब्धि है जहां गरीब परिवारों को मुफ्त एफटीटीएच कनेक्शन प्रदान किए गए हैं.

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