मध्य प्रदेश के भटेबरा पंचायत में वीएलई चेतना डिजिटल उपकरणों से अनजान ग्रामीण महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा

मध्य प्रदेश के भटेबरा पंचायत में वीएलई चेतना डिजिटल उपकरणों से अनजान ग्रामीण महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा

खुद पर विश्वास वह शक्ति है जिससे अपनी बिखरी हुई जिन्दगी में फिर से प्रकाश लाया जा  सकता है। किसी भी इन्सान का वक़्त और हालात कब बदल जाये ये कोई नहीं जानता. लेकिन काफी हद तक हमारी जिंदगी की दशा और दिशा इस बात पर निर्भर करती है कि हम कठिन परिस्थितियों में भी डगमगाएं नहीं।  मध्य प्रदेश के इन्दौर जिले के ग्रामीण क्षेत्र भटेबरा बाजार हातोद की वीएलई चेतना राठौर की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। गुजराती आर्टस एवं कॉमर्स कॉलेज से वी.ए , एल.एलबी. पास चेतना ने अपने परिवार को सहारा दिया, बल्कि गांव में अपना नाम रोशन किया। आज चेतना एक सफल महिला उद्यमी हैं और उनके संघर्ष की कहानी जानकर कोई भी प्रेरित हुए बिना नहीं रह सकता।

चेतना जिस ग्रामीण क्षेत्र व परिवेश से आती हैं वहाँ बेटियों को ज्यादा पढाने लिखाने पर जोर नहीं दिया जाता है। बडा व संयुक्त परिवार होने और विरोध के बावजूद भी चेतना के पिता ने इनकी शिक्षा पर कोई पाबंदी नहीं लगाई और इतना पढ़ाया कि वे दो तीन बार सिविल जज की परीक्षा में उपस्थित हुईं पर आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने से परीक्षा की तैयारी ठीक से नहीं कर पाईं।

सीएससी सेंटर आरंभ करने से पहले चेतना अपने पति के साथ फर्नीचर के व्यवसाय में हाथ बंटाती थीं। सन् 2018 के आरंभ में एक दिन इंटरनेट पर यू-ट्यूब देखते देखते चेतना की नजर सीएससी के एक वीडियो पर पड़ी। जिसने इन्हें खुद के काम को शुरु करने के लिए प्रेरित किया। चेतना ने लोन लेकर एक कमरे से अपना सीएससी प्रारंभ किया । आरंभ में सीएससी के सुचारु संचालन के लिए चेतना को कड़ी मेहनत करनी पड़ी तब जाकर आज 1000  वर्ग फीट में उनका सीएससी कई प्रमुख सेवाएं जैसे  बीमा, बीमा खाता, पीएमजीदिशा, आईआरसीटीसी, एलआईसी प्रीमियम, डिजी-पे, पैन-कार्ड, वाई-फाई चौपाल, टेलीमेडिसिन, बिजली बिल संग्रह और सरकारी परीक्षा आदि प्रदान करता है। चेतना बताती हैं कि उनके सेंटर में दी जाने वाली सबसे अहम सेवाओं में पीएमजीदिशा व बिजली बिल संग्रह है जिसके लिए लोग उनके केंद्र में सबसे ज्यादा आते हैं।

 चेतना ने जब काम करने का फैसला किया तो किसी भी व्यवसाय का तजुर्बा ना होना ये सबसे बड़ी मुश्किल थीं जिनसे उन्हें पार पाना था. इस दौर में उनको परिवार व पति का पूरा सहयोग मिला। 2018 से 2020 तक पीएमजीदिशा के तहत उसने  300 से अधिक बच्चों को प्रशिक्षित किया.

चेतना के लिए, एक उद्यमी होना पहला वास्तविक काम था जिसने उनके जीवन में असीम परिवर्तन करा । उन्होंने कहा कि सीएससी ने न केवल मेरे कौशल को प्रदर्शित करने का एक अवसर दिया, बल्कि मुझे इस तरह के एक चुनौतीपूर्ण समाज में रहने का विश्वास भी दिलाया और बताया कि महिलाएं आज किसी भी क्षेत्र में पुरुषों से पीछे नहीं हैं।  चेतना कहती हैं कि सीएससी ने मुझे मेरे परिवार में ही नहीं वरन समाज, गाँव, राज्य व देश में एक पहचान व सम्मान दिलाया है। सीएससी ने मुझे वो मौका दिया जिससे मैं लोगों के बीच जा सकती हूँ । वीएलई कहती हैं कि मैंने अपने गाँव के हर घर तक सीएससी पहुँचाया है। आर्थिक गणना में वीएलई ने 2000  परिवारों का सर्वेक्षण किया है.

 चेतना ने सीएससी लाभार्थियों का अनुभव शेयर करते हुए बताया कि एक बार लॉकडाउन के दौरान बेहद गरीबी की मार झेल रहा किशन (बदला हुआ नाम) आया,  जिसको अपनी विधवा माँ की पेंशन निकालनी थी। बैंको में भीड़ होने के कारण वो अपनी माँ को बैंक ले जाने में असमर्थ था। दो महीने से काम ठप्प होने के कारण वह बेहद आर्थिक तंगी से गुजर रहा था। ऐसे में माँ की पेंशन ही एक आस थी। गाँव वालों से पता चलने पर वह वीएलई के सेंटर आया। उसकी आप-बीती सुनने के बाद चेतना ने अपना लैप-टॉप लिया और पेंशन दफ्तर गई और किशन को उसकी माता जी की वृद्धावस्था पेंशन दिलाई ।

 वीएलई कहती हैं कि उनके सीएससी सेंटर की मुख्य सेवा बिजली बिल संग्रह की है और अब तक वह 30 लाख रु के बिजली बिल संग्रह कर चुकी हैं। इसी संदर्भ में उन्होंने बताया कि उनके पास एक गरीब महिला आई जो अपनी बिजली काटे जाने से बहुत दुखी थी। उसने बताया कि उसका 5000 रु का बिजली का बिल आया। वो रोने लगी कि मैं वहुत गरीब हूँ इतना बिल कहाँ से भरुंगी। वीएलई ने अपने सीसएससी वॉलेट से 2500 का भुगतान करके फौरन उसके घर बिजली की सेवा मुहैया कराई। उस बुजुर्ग महिला ने वीएलई को ढेर सारा आशीर्वाद दिया ।

 चेतना ने बताया कि पहले इसी सेवा के लिए सभी गाँव वाले  लम्बी यात्रा करके शहर जाते थे लेकिन अब मेरे सीएससी सेंटर पर नागरिक सभी सेवाओं का आसानी से लाभ प्राप्त कर पाते हैं।  

पहले अपने पति के साथ पंचर घिसने वाला ब्रुश बनाना छोड़ सीएससी उद्यम की तरफ बढ़ रही चेतना जैसी हजारों महिलाएं देश में युवा सशक्तिकरण का अनूठा उदाहरण पेश कर रही हैं।  वीएलई कहती हैं कि वह अकेले ही सीएससी का संचालन सफलतापूर्वक कर रही हैं और अपने गांव के कई युवतियों के लिए एक मिसाल हैं।

 कोविड महामारी के दौरान ग्रामीण और शहरी स्कूली शिक्षा के बीच संरचनात्मक असंतुलन बहुत अधिक है। शिक्षा के क्षेत्र में बच्चों और युवाओं के अध्ययन में काफी व्यवधान हुआ। हालांकि इससे दूरस्थ शिक्षा के लिए संभावनाएं खुल गईं, लेकिन साथ ही इससे आर्थिक, सामाजिक, डिजिटल और शैक्षिक असमानताओं से जुड़ी चुनौतियां भी सामने आई हैं. वीएलई ने इस महामारी के दौरान आस पास के गांवों में एक बड़ी आबादी को ऑनलाइन शिक्षण उपलब्ध कराया है।

इस गांव में लगभग दो तिहाई घरों में इंटरनेट कनेक्टिविटी नहीं है। वीएलई के अथक प्रयासों के कारण आज ग्रामीण इंटरनेट सेवाओं से भी लाभान्वित हो रहे हैं।  

चेतना के शब्दों में, मैं अपने सीएससी सेंटर को ऐसा मॉडल सीएससी सेंटर बनाने जा रही हैं जहाँ पर सीएससी की हर सर्विस जैसे टेली-लॉ, , बैंकिंग, लोन एवं फाइनेंस शिक्षा संबधी आदि अन्य सेवाओं के लिए अलग-अलग विभाग व हर विभाग में निपुण प्रतिनिधि काम करें। मैं अपने सीएससी सेंटर का विकास करना चाहती हूँ ताकि गाँव के लोगों को बाहर ना जाना पडे और ग्रामीण महिलाएं निसंकोच मेरे सेंटर पर आ सकें। मैं सभी को डिजिटली साक्षर करना चाहती हूँ ताकि कोई भी बेटी या महिला किसी के सामने बेबस ना हो और आत्म निर्भर बने।

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