हौसले से उड़ान- छत्तीसगढ़ के तालुका डोंगरगढ़ की वीएलई पिंकी की कहानी

हौसले से उड़ान- छत्तीसगढ़ के तालुका डोंगरगढ़ की वीएलई पिंकी की कहानी

किसी भी कार्य में सबसे अहम है भरोसा और वह भरोसा मिलता है सीएससी से। पंजाब के मोगा में जन्मीं पिंकी 10 वीं तक पढ़ाई करने के बाद शादी के बाद छत्तीसगढ़ आ गई । छत्तीसगढ़ के छोटे से तालुका डोंगरगढ़ में उनके पति की किराए की छोटी सी फोटोकॉपी की दुकान थी जिसे  लोन के जरिए लिया गया था । पर कमाई इतनी भी नहीं थी कि अपने बच्चों का सही से भरण-पोषण किया जा सके । कमाई का अधिकांश रूपया दुकान व घर के किराए एवं बैंक के लोन में चला जाता था।

पर कहा जाता है कि “जो अपने कदमों की काबलियत पर भरोसा रखते हैं, वो ही अक्सर मंजिल पर पहुंचते हैं”।

पढ़ने की ललक तो थी ही पिंकी को तो पति के घर आकर 12 वीं की परीक्षा अच्छे नंबरों से  उत्तीर्ण कर ली।  कुछ कर गुजरने और आसमान में उड़ने की ललक मन समेटे हुए बस पंख की तलाश कर रही थी। इस सब में अगर सबसे ज्यादा किसी ने साथ दिया तो वह थे पिंकी के पति ने। पिंकी बताती हैं, “मुझे हमेशा से व्यवसाय करने की ललक रही है. मैं समाज के हाशिए पर रह रहे वर्गों का समर्थन करने के लिए कुछ करना चाहती थी। यही मेरे सीएससी शुरू करने का लक्ष्य था”।

 2014 में एक अखबार में सीएससी शुरू करने का विज्ञापन देखकर, सीएससी आईडी के लिए अप्लाई किया और सीएससी शुरू करने का फैसला लिया. इस फैसले से सीएससी शुरू करने के बाद से ही जिंदगी का रुख ही बदल गया। आज 500  वर्ग फीट की खुद की दुकान मे पिंकी सीएससी सेंटर चलाती हैं।  वह गर्व से कहती हैं कि 1000 फीट का पक्का घर सीएससी के बदौलत है । आज उनके ऊपर कोई कर्ज नहीं है । उनके दो बच्चे हैं दोनों को सीएससी की बदौलत उच्च शिक्षा भी मिल रही है  और उनके पति सीएससी सेंटर चलाने में उनकी मदद करते हैं।

एक घटना का स्मरण करते हुए पिंकी ने बताया कि  सीएससी के लाभार्थियों में से एक 28  वर्षीय दिव्यांग सुनीता बाई  जो पहले घर-घर काम किया करती थी मेरे सीएससी सेंटर आई । आर्थिक तंगी व समय की मार से परेशान सुनीता का मनोबल बढ़ाया और सीएससी के माध्यम से स्किल इंडिया का DDO कोर्स पूरा कराया । आज वह जनपद पंचायत मनकी में डेटा एंट्री ऑपरेटर के रूप में काम कर रही हैं। उसकी मेहनत व लगन से पिंकी के गाँव की कई महिलाओं को प्रेरणा मिली।

पिंकी  कहती हैं कि सीएससी से उचित लागत और कम समय में दरवाजे पर सेवाएं प्राप्त करने के बाद लाभार्थियों की संतुष्टि देखने लायक होती हैं।” पिंकी बताती हैं कि सीएससी उनके जीवन में एक चमत्कार की तरह रहा है। इसने न केवल मेरे जीवन में बदलाव लाया है बल्कि लोगों के जीवन स्तर में भी काफी सुधार किया है।

  वीएलई पिंकी ने सीएससी के माध्यम से  81000 वाहनों का बीमा , 25000 वृद्धजनों का निशुल्क जीवन प्रमाण पत्र  कार्ड, 2000 पासपोर्ट, 18000  महिलाओ का श्रम कार्ड बनाया है। आज उसी श्रम लेबर कार्ड  से महिलाये अनेक सरकारी योजनाओ का लाभ प्राप्त कर रही है। सीएससी वीएलई पिंकी द्वारा  25,000 फास्टैग भी बनाए गए हैं। इसके अलावा बीमा, डिजी-पे, एनपीएस, बिजली बिल संग्रह, पीएमएसवाईएम, पीएमकेएमवाई, एफएसएसएआई सेवाएं उनके केंद्र से दी जा रही हैं।  वीएलई ने अब तक डिजी-पे  के माध्यम से 400 से अधिक वृद्धों को पेंशन वितरित की है।

 नई दिल्ली में आयोजित एक समारोह के दौरान सबसे ज्यादा इन्श्योरेंश में महत्वपूर्ण योगदान के लिए छत्तीसगढ़ सीएससी पुरस्कार एवं स्कॉच अवार्ड भी सम्मानित किया गया है ।  पिंकी को महिला सशक्तिकरण के लिए अग्र अलंकरण समारोह 2016-18 से भी सम्मानित किया गया है।

पिंकी ने अपने सीएससी पर 12 लोगों को रोजगार दिया हुआ है जिसमें से एक दिव्यांग हैं।

सीएससी ने पिंकी  जैसी उन हज़ारों महिलाओं को सशक्त बनाने में अहम भूमिका निभाई है जो अब अपने कौशल के प्रति आश्वस्त हैं और आर्थिक रूप से स्वतंत्र हो गई हैं।

पिंकी  का कहना है कि भविष्य रोमांचक एवं नई संभावनाओं से भरा है। “हम हर नई सेवा को नए तरीके से लागू करने में यकीन करते हैं क्योंकि हर गांव की पृष्ठभूमि और ज़रूरतें अलग – अलग होती हैं. भविष्य में वीएलई अपनी टीम का विस्तार करना चाहती हैं, अधिक से अधिक लोगों को रोजगार देना चाहती हैं व महिलाओं के जीवन को अधिक प्रभावित करना चाहती हैं ताकि ग्रामीण महिलाएं अपने लिए सजग व जागरुक हों। इस सब के साथ वे राजस्व के मामले में अन्य ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी इंफ्रास्ट्रक्चर सुविधा का विस्तार करना चाहती हैं।

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