छत्तीसगढ़ के दूरदराज स्थित गाँव देवरी को डिजिटली सशक्त करती सीएससी वीएलई अनीता बगरिया

छत्तीसगढ़ के दूरदराज स्थित गाँव देवरी को डिजिटली सशक्त करती सीएससी वीएलई अनीता बगरिया

लैंगिक समानता न केवल एक मौलिक मानव अधिकार है बल्कि यह एक समृद्ध आधुनिक अर्थव्यवस्था की रीढ़ है जो स्थायी समावेशी विकास प्रदान करता है। आज देश के दूरदराज स्थित गांवों में 50,000 से अधिक सीएससी महिला वीएलई लैंगिक समानता, “महिलाओं की पूर्ण आर्थिक और सामाजिक भागीदारी” की प्रतिबद्धता के साथ डिजिटल दुनिया में आर्थिक विकास के नए स्रोत प्रदान कर रही हैं।

इसी क्रम में छत्तीसगढ़ के जिला बालोद की तहसील ढोंढीलोहारा के गाँव देवरी की अनीता बगरिया आज सफल सीएससी वीएलई हैं। वीएलई अनीता रांची विश्वविद्यालय से बी. कॉम करके पंडित किशोरी लाल शुक्ला लॉ कॉलेज से एल.एल.बी. भी कर रही हैं। इन्होंने टैली और कम्प्यूटर कोर्स भी किया हुआ है। इतनी शिक्षा के बाद अनीता कहीं भी नौकरी के लिए आवेदन कर सकती थीं। लेकिन वीएलई ने खुद का कम्प्यूटर सेंटर चलाना आरंभ किया। चूंकि अनीता का गाँव दूरदराज इलाके में है और पिछड़ा है इसलिए वहाँ के अधिकतर लोग डिजिटली साक्षर नहीं थे । अनीता अपने गाँव का विकास करना चाहती थीं। कुछ ऐसा करना चाहती थीं जिससे उन्हें भी पहचान मिले और गाँव के नागरिक भी लाभान्वित हों।

एकदिन अपने कम्प्यूटर सेंटर पर कुछ सर्च करते करते अनीता को सीएससी के बारे में पता चला। सीएससी के बारे में और जानने की उत्सुकता में उन्होंने सीएससी और उसके द्वारा दी जाने वाली सेवाओं के बारे में विस्तार से जाना और सीएससी वीएलई बनने का निर्णय लिया।

अनीता ने जुलाई 2015 में सीएससी आई-डी हासिल की और अकेले ही एक कमरे से सीएससी सेंटर चलाना आरंभ किया । शुरुआत में लोगों को अपने सेंटर तक लाने और उनमें विश्वास पैदा करने में वीएलई को काफी मशक्कत करनी पड़ी. अनीता के पति ने इस सब में उसका बहुत साथ दिया और हौसला भी बढ़ाया।वीएलई अनीता अपने केंद्र में कई सीएससी सेवाएं जैसे बीमा, पैन कार्ड, डिजी-पे, मोबाइल- डाटा कार्ड रिचार्ज, एलआईसी प्रीमियम, पीएमएसवाईएम, बिजली बिल संग्रह और सरकारी परीक्षा आदि सेवाएं प्रदान करती हैं। वीएलई के शब्दों में उनके सेंटर पर सबसे ज्यादा ग्रामीण नागरिक डिजी-पे सेवा का लाभ लेने के लिए आते हैं। डिजी-पे वीएलई के केंद्र पर सबसे अधिक दी जाने वाली सेवाओं में से एक है। अनीता प्रतिदिन डिजी-पे के माध्यम से 50,000 /-  से अधिक का लेनदेन करती हैं। उनके सेंटर पर हर रोज 90 से 100 नागरिक आते हैं जिसमें से अधिकतर लोग डिजी-पे के माध्यम से मनी-ट्रांसफर,  नकद निकासी और जमा करने के लिए आते हैं।

आज अनीता के सीएससी के जरिए हुआ डिजिटल बदलाव देवरी और आस-पास के गांवों की हजारों महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए नए रास्ते प्रदान कर रहा है और अधिक से अधिक लैंगिक समानता में योगदान कर रहा है। वीएलई अनीता इंटरनेट, डिजिटल प्लेटफॉर्म, मोबाइल फोन और डिजिटल वित्तीय सेवाएं के माध्यम से समाज के वंचित समुदायों में सभी के लिए समान अवसर प्रदान करती हैं और महिलाओं का सशक्तिकरण करके असमानता की खाई को पाटने में मदद कर रही हैं।

वीएलई ने बताया कि उनके गाँव में एक दिव्यांग धनेश हैं जो एक होटल में बरतन धोने का काम करते हैं। धनेश को अपनी दिव्यांग पेशन लेने में बहुत दिक्कतों का सामना करना पड़ता था क्योंकि बैंक उनके घर से 10 किमी से भी अधिक दूरी पर था। धनेश को बैंक जाने के लिए बस पकड़नी होती थी जो उसके लिए जोखिम भरा होता था । एक दिन बस में मेरी मुलाकात धनेश से हुई तो बातों बातों में उनकी समस्या को समझते हुए उनके घर जाकर पेंशन निकाल कर दी। उसके चेहरे की खुशी ने मेरे मन में और अधिक आत्म-विश्वास भरा कि मैं सीएससी सेवाओं के जरिए अपने गाँव के लोगों के लिए कुछ करके अपनी पहचान बना पा रही हूँ।

वीएलई गांव के हर बुजुर्ग व दिव्यांगजनों को उनके घर जाकर पेंशन निकालकर व जीवन प्रमाण-पत्र बनाकर देती हैं। अनीता एचडीएफसी व डिजी-पे के माध्यम से आस-पास के ग्रामीणों को भी बैंकिंग सेवाएं  प्रदान करातीं हैं।

सीएससी वीएलई अनीता ने अपने सेटर पर तीन लोगों को रोजगार भी दिया । आज उनके पास तीन डेस्कटॉप, चार प्रिंटर, एक स्कैनर व फोटोकॉपी मशीन भी है। वह कहती हैं- “सीएससी ने मेरी आय व रोजगार बढ़ाने में बहुत मदद की है। सीएससी ने मुझे पहचान के साथ-साथ आर्थिक सशक्तिकरण प्रदान किया है। सीएससी की हर सेवा को आम-आदमी तक पहुंचाने का मैं हर संभव प्रयास करती हूँ। आज सीएससी सेवाओं से मेरी सालाना आमदनी 2.5 से 3.0 लाख है। इन सबके लिए मैं सीएससी की शुक्रगुजार हूँ। आने वाले समय में मैं सीएससी की सभी अन्य सेवाओं को अपने सेंटर के जरिए लोगों तक पहुँचाना चाहती हूँ ताकि मैं अपने गाँव के लोगों को सीएससी के माध्यम से दी जाने वाली सभी सरकारी सेवाओं का लाभ दिला सकूं।”

बकौल अनीता- “महिलाएं अतिरिक्त आय अर्जित करें, रोजगार के अवसरों में वृद्धि हो, और आर्थिक विकास और अधिक समावेशी बने- यही अब मेरे सीएससी का मिशन है।”

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