नौबतपुर (बिहार) में महिलाओं के डिजिटल वित्तीय सशक्तिकरण की तरफ सीएससी के बढ़ते कदम

नौबतपुर (बिहार) में महिलाओं के डिजिटल वित्तीय सशक्तिकरण की तरफ सीएससी के बढ़ते कदम

कोविड वैश्विक महामारी ने पूरी दुनिया को प्रभावित किया है- भले ही वह कितना ही अमीर या गरीब देश हो। इन सभी देशों के आर्थिक गतिविधियों में भारी गिरावट आई है जिससे लाखों महिलाएं बेरोजगार हुईं हैं। आईएमएफ ने चेतावनी दी है कि साल 2021 में विकास की दर काफी धीमी रहेगी जिससे हमें पहले की सामान्य स्थिति तक लौटने में समय लगेगा। इस महामारी के बाद कमजोर आर्थिक स्थिति वाली महिलाओं के लिए जीविका का नया संकट पैदा हो गया है, नतीजतन इन महिलाओं के जीवन में वैश्विक संकट से उबरने के लिए फाइनेंशियल इन्क्लूजन की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।

 इसी पृष्ठभूमि में अगर देखा जाए तो हम पाते हैं कि कोविड महामारी के दौरान भारत में 4 लाख सीएससी केंद्रों ने डिजिटल वित्तीय सेवाओं के जरिए लाखों महिलाओं के लिए अवसरों का विस्तार किया है। देश के दूरदराज इलाकों में मौजूद सीएससी वीएलई के प्रयासों की वजह से भारत में आज 79% भारतीय महिलाओं के पास बैंक खाता है जबकि 2014 में यह आंकड़ा महज 43 फीसदी था।

बिहार के पटना के नौबतपुर में, सीएससी बैंकिंग ग्रामीण महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए एक शक्तिशाली माध्यम के तौर पर में उभरा है। वीएलई राजीव रंजन पिछले 5 वर्षों से महिला वित्तीय सशक्तिकरण के क्षेत्र में लगातार काम कर रहे हैं।

बिहार का  नौबतपुर ब्लॉक देश में हाल ही में हुए विकास से अभी भी काफी दूर है। बुनियादी बैंकिंग सेवाओं का लाभ उठाने के लिए कई लोग बैंकों से अभी भी नहीं जुड़ पा रहे हैं। बकौल वीएलई राजीव, “बैंकों में अपनी मेहनत की कमाई रखने के लिए यहां के लोग बैंकिंग सेवाओं का उपयोग करने से हिचकिचाते थे। इन सबसे ऊपर, किसी भी सेवा तक पहुँचने के लिए बैंक की मुख्य शाखा तक जाना मुश्किल था। पांच साल पहले मैं खुद इस तरह का ग्राहक था और इन समस्याओं का सामना कर रहा था। मई 2016 में, अपने गाँव में आयोजित हो रहे डिजिटल इंडिया के एक कार्यक्रम में भाग लेने गया। कार्यक्रम से लौटते समय, मुझे मेरे एक मित्र ने कॉमन सर्विस सेंटर के बारे में बताया और फरवरी 2017 में, बैंक ऑफ इंडिया के लिए मैं बैंकिंग कॉरेस्पोंडेंट बन गया।

अगले दो वर्षों में, वीएलई ने 6000 बैंक खाते खोले. यह ध्यान देने योग्य बात है कि इनमें से लगभग 95 फीसदी  खाते महिलाओं के थे। वीएलई ने स्कूल जाने वाली लड़कियों के लिए भी वित्तीय समावेशन के लिए काफी काम किया। इससे पहले, शायद ही इनमें से किसी भी युवा लड़कियों के बैंक खाते थे। उनमें से अधिकांश बच्चियां, बैंक के काम के दौरान स्कूलों में उपस्थित रहती थीं और मार्गदर्शन की कमी ने उन्हें अपने खाते खोलने की अनुमति नहीं दी।

वीएलई राजीव की मदद से, औपचारिक अर्थव्यवस्था में नौबतपुर में महिलाओं की भागीदारी बढ़ गई है। वित्तीय, आर्थिक और स्वास्थ्य संबंधी जरूरतें पूरी की जा रहीं है।

इनमें से एक लाभार्थी हैं-राधा जो अपनी जीविका के लिए सब्जियां बेचती हैं। पैसे जमा करने या निकालने के लिए वह बैंक नहीं जा पाती थीं। राधा अपनी दैनिक कमाई को लेकर लगातार चिंतित रहती थी। वीएलई राजीव ने उसका बैंक खाता खोला और वह अब नियमित रूप से पैसा जमा करती है।

एक अन्य मामले में, श्रीमती लालमती देवी ने राजीव के संपर्क में आने के बाद अपनी वृद्धावस्था पेंशन प्राप्त करना शुरू कर दिया है। वह 100 साल की हैं और गाँव में अकेली रहती हैं। उनकी बुनियादी जरूरतें भी पूरी  नहीं हो पाती थीं। वीएलई राजीव हर महीने उनके घर जाते हैं और उन्हें उनकी पेंशन की राशि देते हैं। लालमती अपनी पेंशन की पहली किस्त प्राप्त करने के बाद काफी भावुक हो गईं और सभी के लिए मिठाई भी खरीदी। ऐसे हजारों वृद्ध महिलाओं को सीएससी के माध्यम से लाभान्वित किया गया है।

इन महिलाओं में से कई दिहाड़ी मजदूर या किसान हैं और वे एक वैध बैंक खाता नहीं होने के कारण सरकारी सब्सिडी प्राप्त करने में सक्षम नहीं थे। इसलिए, उनकी ऐसी समस्याएं सीएससी बैंकिंग सेवाओं के माध्यम से हल की गईं।

 वीएलई कहते हैं, “सीएससी के माध्यम से वित्तीय समावेशन इन महिलाओं को संपत्ति जमा करने, आय उत्पन्न करने, वित्तीय जोखिमों का प्रबंधन करने और अर्थव्यवस्था में पूरी तरह से भाग लेने के लिए उपकरण प्रदान करता है। महिलाएं पुरुषों की तुलना में घरेलू आय में अपनी आय के बड़े हिस्से का योगदान करती हैं। वित्तीय समावेशन में महिलाओं को शामिल करने से नौबतपुर, पटना में आज हजारों परिवारों, समुदायों और पूरे समाज को लाभ मिल रहा है। ”

राजीव को यह भी याद है कि कैसे उन्होंने 58 साल की श्रीमती माधुरी की जान बचाई थी। वह एक आपातकालीन ऑपरेशन से गुजर रही थीं और तत्काल धन की आवश्यकता थी। सुबह 4 बजे का समय था जब उनके परिवार के सदस्य ने राजीव से संपर्क किया और कुछ ही क्षणों में, वह अपने बैंक खाते से पैसे निकालने में सक्षम हुईं जिसके परिणामस्वरूप एक सफल ऑपरेशन हुआ।

स्वास्थ्य और स्वच्छता

राजीव की सीएससी टीम महिला स्वास्थ्य और स्वच्छता के क्षेत्र में भी काम कर रही है। गांव में एक सैनिटरी नैपकिन निर्माण इकाई स्थापित की गई और 40 से अधिक महिलाओं ने नैपकिन बनाने का प्रशिक्षण प्राप्त किया।

जनवरी 2019 से, स्थानीय स्तर पर सैनिटरी नैपकिन का निर्माण शुरू हुआ। धीरे-धीरे टीम बढ़ती गई और वर्तमान में, 8 महिलाएँ निर्माण इकाई में काम करती हैं, जिसमें 200 से अधिक नैपकिन दैनिक आधार पर बनाए जाते हैं। इन सस्ती और स्वास्थ्यकर नैपकिन को बेचने के लिए 4 महिलाओं का एक समूह घर-घर जाता है। स्थानीय दुकान मालिक इन पैड्स को ग्रामीणों को बेचने में मददगार साबित होते हैं। महिला स्वास्थ्य और स्वच्छता के महत्व के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए ‘जीविका दीदी’ समूह के माध्यम से नियमित जागरूकता शिविर भी आयोजित किए जा रहे हैं।

(पाठक अपनी प्रतिक्रिया dhirendra.singh@csc.gov.in पर भेज सकते हैं)

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