कैसे एक घरेलू महिला बन गई बिजनेस वुमन- छत्तीसगढ़ के दूर-दराज सिमगा ब्लॉक से वीएलई अंगिता की कहानी

कैसे एक घरेलू महिला बन गई बिजनेस वुमन- छत्तीसगढ़ के दूर-दराज सिमगा ब्लॉक से वीएलई अंगिता की कहानी

देश भर में मौजूद 4 लाख सीएससी दूर दराज स्थित गांवों में डिजिटल अर्थव्यवस्था के जरिए महिलाओं को सशक्त कर रहे हैं, इनमें वे महिलाएं भी बड़ी संख्या में शामिल हैं जो पारंपरिक श्रम बाजारों से पृथक हैं। छत्तीसगढ़ के जनजातीय बहुल इलाके में यह बात विशेष रूप से लागू होती है, जहां महिलाओं के संदर्भ में सांस्कृतिक पूर्वाग्रह, घर से बाहर निकलने में टैबू, सुरक्षा और अन्य कारक महिलाओं को अर्थव्यवस्था में अपना सही स्थान बनाने से रोकती हैं। सीएससी के जरिए उत्पन्न डिजिटल अर्थव्यवस्था महिलाओं के लिए अवसरों की दुनिया को खोल रहा है और विकास के नए मानक स्थापित कर रहा है।

छत्तीसगढ़ के दूर दराज स्थित ब्लॉक सिमगा में महिला वीएलई अंगिता के लिए खुद का काम शुरू करना इतना आसान नहीं था। उनके पास भी बाकी गृहणियों की तरह काफी जिम्मेदारियां थीं लेकिन उनकी मेहनत, लगन और सही सोच ने उन्हें आज इस मुकाम तक पहुंचाया है जहां वे अपने घर की जिम्मेदारियों के साथ-साथ सीएससी केंद्र सफलतापूर्वक चला रहीं हैं और गांव के लोग भी उनसे बेहद खुश रहते हैं उनकी सीएससी से जो भी एक बार सेवाएं लेता है उसके बाद वो कहीं और नहीं जाता।

सिमगा ब्लॉक के जनकराम साहू को दिव्यांग होने के कारण आने जाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। वीएलई अंगिता ने उनके घर जाकर डिजी-पे से पेंशन दिलाकर उनके चेहरे पर मुस्कान लाई। ऐसे ही कई दिव्यांग और असहाय लोगों की मदद करके अंगिता अपने ब्लॉक के लोगों के लिए मसीहा बन गईं हैं। छत्तीसगढ़ के जिला बलौदाबाजार के ग्राम हिरमी की स्नातक पास वीएलई अंगिता वर्मा पहले एक साधारण गृहिणी थीं व अपने दो बच्चों के लालन पालन में ही समय व्यतीत करती थीं। चूंकि अंगिता स्नातक पास थीं इसलिए वो आगे काम करना चाहती थीं पर जिस माहौल में उनकी शादी हुई वहाँ महिलाओं को ज्यादा आजादी नहीं थी। कम आबादी और रुढ़िवादी विचारधारा वाले गाँव में आगे बढ़ना अंगिता के लिए कठिनाइयों से भरा हुआ था।

ये साल 2008 का समय था जब एक दिन घर पर अखबार पढ़ते हुए उनकी नजर सीएससी के विज्ञापन पर पड़ी। थोड़ा बहुत कम्प्यूटर का ज्ञान तो था ही, साथ ही पति के सहयोग से अंगिता ने सीएससी आईडी लिया और एक कम्प्यूटर, प्रिंटर और कुछ सेवाओं के साथ अपना सीएससी शुरु किया । वीएलई अपने केंद्र में आज बिजली बिल, पैन कार्ड, मजदूर पंजीकरण, डिजी-पे, पीएमजीदिशा, सभी प्रकार की बीमा सेवाएं, जीवनप्रमाण पत्र , वोटर आईडी कार्ड प्रिंट , ई-स्टाम्प , आईआरसीटीसी, रेलवे टिकट, ई –डिस्ट्रिक्ट, आधार पंजीयन, मानधन योजना, पीएम-किसान आदि सेवाएं दिला रही हैं । समय-समय पर सीएससी द्वारा दिए गये प्रोजेक्ट्स के काम तथा अन्य सीएससी सेवाएं अंगिता अपने सेंटर पर प्रदान करती हैं ।

अंगिता के केंद्र पर सबसे ज्यादा दी जाने वाली सेवा है डिजी-पे। इस सेवा के लिए उनके सीएससी से प्रतिदिन 1.5 लाख रुपए का लेनदेन किया जाता है। दिव्यांग और वृद्धावस्था पेंशन घर पहुँच कर डिजी-पे के माध्यम से दी जाती है।

वीएलई ने पीएमजीदिशा के तहत 300 पंजीकरण, 850 बिजली बिल संग्रह भी किए हैं। वीएलई का रुझान शुरु से ही बच्चों की शिक्षा पर रहा इसलिए उन्होंने अपने ब्लॉक के आस-पास के बच्चों को डिजिटल इंडिया के तहत कंप्यूटर प्रशिक्षण दिलाकर उनको डिजिटली साक्षर किया।

डिजिटल साक्षरता

जीएसएमए की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में सिर्फ 12 फीसदी ग्रामीण महिलाओं तक ही इंटरनेट की पहुंच उपलब्ध है. इसी पृष्ठभूमि में वीएलई अंगिता ने डिजिटल साक्षरता के जरिए अपने पंचायत में समावेशी विकास का बीड़ा उठाया है. पिछले तीन साल में उन्होंने सैकड़ों आदिवासी महिलाओं को घर घर जाकर डिजिटल साक्षर किया है. इन लोगों को शिक्षा देने में भाषा एक बड़ा अवरोध है, अधिकांश गावों के करीब पांच लाख लोग ऐसे हैं जो कि हिंदी नहीं जानते, उन्हें उनकी प्राथमिक शिक्षा स्थानीय बोली गोंडी, हल्बी, माडि़या में कराई जाती है। वीएलई बच्चों और बुजुर्ग महिलाओं को स्थानीय गोंडी और हल्बी भाषा में ही इंटरनेट के जरिए सशक्त कर रहीं हैं। पीएमजीदिशा कार्यक्रम ने यहां की जनजातीय महिलाओं को शिक्षा के साथ रोजगार और अपने दम पर निर्णय लेने की क्षमता दिलाई है।

गाँव के लोगों को बिजली के बिल जमा करने के लिए 15 किमी दूर जाना पड़ता था पर अब गांव के लोग सीएससी सेंटर के माध्यम से बिजली का बिल जमा करते हैं और समय की बचत करके अन्य काम कर रहे हैं।

अंगिता 10 साल पहले एक गृहिणी थीं और अब छत्तीसगढ़ के सबसे सफल महिला वीएलई में से एक है। वो कहती हैं, “मैं एक गृहिणी थी। मुझे बिजनेस करने, व्यापार योजनाओं और रणनीतियों को बनाने का बिल्कुल भी अनुभव नहीं था। लेकिन सीएससी से मिला हुआ मंच मेरे लिए एक साधारण गृहिणी से बिजनेस वुमन बनने की दिशा में धीमा लेकिन सकारात्मक बदलाव था।”

अंगिता बताती हैं कि एक कंप्यूटर के साथ चालू किए गए काम में धीरे धीरे सीएससी सर्विसेज बढ़ती  चली गयी और साथ ही साथ हमारा काम भी बढ़ता चला गया| आज उनके पास 10 डेस्कटॉप और 2 लैपटॉप हैं | 4 ऑपरेटर को उन्होंने अपने सीएससी सेंटर में रोजगार भी दिया है | बकौल अंगिता, “कोई भी एक गृहिणी की भूमिका के तौर पर औरत की कड़ी मेहनत और प्रतिष्ठा को दरकिनार नहीं कर सकता। एक गृहिणी परिवार को मैनेज करने के साथ-साथ बच्चों की देखभाल भी करती है। लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि वे केवल इन्ही कामों के लिए बनी हैं। ऐसी महिलाएं भी हैं जो नौकरियों की तलाश करना या व्यवसाय शुरू करना पसंद करती हैं, और सीएससी ने ऐसी महिलाओं के लिए एक सशक्त मंच उपलब्ध कराया है.”
(पाठक अपनी प्रतिक्रिया dhirendra.singh@csc.gov.in पर साझा करें.)

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