महाराष्ट्र के भद्रपुर गाँव की सीएससी वीएलई ममता सारडा ने कोविड व़ॉरियर के रुप में लहराया अपना परचम

महाराष्ट्र के भद्रपुर गाँव की सीएससी वीएलई ममता सारडा ने कोविड व़ॉरियर के रुप में लहराया अपना परचम

“जब तक हम किसी काम को शुरु नहीं करते तब तक वो काम हमें नामुमकिन ही लगता है”नेल्सन मंडेला की इन्हीं पंक्तियों को जीवन में उतार कर आगे बढ़ने की ढानने वाली महाराष्ट्र के जिला चंद्रपूर के भद्रपुर ब्लॉक की ममता सारडा की कहानी आज हर ग्रामीण महिला के लिए मिसाल बनी हुई है.

सीएससी वीएलई ममता मनीष सारडा ने अपनी सीएससी यात्रा को हमारे साथ शेयर करते हुए बताया कि उनकी जिंदगी की शुरुआत एक हाउसवाइफ से हुईथी । वे एक भरे पूरे परिवार से संबध रखती थी। उनके ससुराल में परिस्थिति एकदम विपरीत थी। पढ़ी लिखी होनेके बाद भी ममता घर गृहस्थी मे ही सिमट कर रह गयी। वीएलई ने बताया कि शादी के 10 साल बाद उन्हें कंप्यूटर से जुडा हुआ बिजनेस करने का अवसर मिला, उसके बाद भी वे पूरी तरह से अकेले स्वतंत्र रुप से स्वयं का बिजनेस करना चाहती थी। ज़ब सीएससी की शुरवात हुईतब ममता ने सीएससी  का आई-डी बनाया। ममता कहती हैं कि मुझे शुरू से ही आम जनता की सेवा करने की इच्छा थी, उनके बीच जाकर उनकी समस्या को हल करना व गरीबों की मदद करना मुझे अच्छा लगता था ।

कोविड-19 के दौरान किए गए कार्य 

कोविड के दौरान वीएलई के सराहनीय काम की जितनी प्रशंसा की जाए कम है। जब कोविड अपने चरम पर था तब सीएससी वीएलई ममता ने हर उस ग्रामीण की मदद की जो हिम्मत हार चुका था । वीएलई ने हर उस सेवा का लाभ नागरिकों तक पहुँचाया जो उस समय के हालात में असम्भव था। ममता ने बताया कि उनके ब्लॉक भद्रपुर की महिला दीपा पिंपलकर जो कोविड में बहुत खराब आर्थिक तंगी का सामना कर रही थी । जब दीपा को पता चला कि सरकार महिलाओं के खाते में 500 रु डाल रही है तब दीपा को समझ नहीं आया कि वो कैसे अपने खाते में आई राशि को निकाले क्योंकि लॉकडाउन के चलते सब बंद था और बैंक की लंबी कतार में लगने की उसकी हिम्मत नहीं थी । तब उसके लिए आशा की किरण बनी वीएलई ममता जिन्होंने डिजी-पे के माध्यम से दीपा को उसकी राशि दिलाई।

  वीएलई ने बताया कि एक दिन मंजू डोले (बदला हुआ नाम) की बहू ने उन्हें फोन किया कि उसे अपनी सास का जीवन प्रमाण पत्र बनवाना है लेकिन मंजू चलने फिरने में असमर्थ है। तब मैंने घर जाकर उनका जीवन प्रमाण पत्र बनाया ।

टेली-स्वास्थ परामर्श पर सीएससी वीएलई ममता का काम प्रशंसनीय है। लॉकडाउन के दौरान सामाजिक दूरी व नियमों का पालन करते हुए लगभग 300 नागरिकों को टेली-स्वास्थ परामर्श का लाभ दिलाया। डॉक्टर्स से वीडियो कॉन्फ्रेंसिग व फोन पर बात करा कर नागरिकों को स्वास्थ लाभ दिलाया । कोरोना का डर जो ग्रामीण नागरिकों के मन में समा गया था उस डर को खत्म करने के लिए ममता ने कई जागरुकता शिविर आयोजित किए और लोगों को अपने आस-पास की साफ सफाई रखने  व सभी कोरोना से संबधित नियमों का कडाई से पालन करने पर जागरुक किया।

सीएससी ग्रामीण ई-स्टोर

ममता ने सीएससी ग्रामीण ई-स्टोर की जानकारी ग्रामीणों तक आगे बढ़ाने के लिये, पेपर वर्क, विज्ञापन, का सहारा लिया। ई-स्टोर के माध्यम से हमारा प्रथम उद्देश्य ग्रामीणों की आवश्यकता क्या है, उनको सस्ता समान उपलब्ध कराना, जो भी जिले में किसान है जिनके पास खाध जैसे गेहूँ,चावल,जवारी,मक्का,की उत्पादन क्षमता अधिक है ,उन का माल उचित मूल्य में लेकर उपभोक्ता तक पहुचना था।  जिससे किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य प्राप्त हो और जिले में ही खाध सामग्री का वितरण भी हो।हमे इस कार्य को आगे बढाने के लिए विभिन्न क्षेत्रों में कार्य करने वाले एजेंट, महिला गृह उद्योग से,संपर्क एवं सहयोग की आवश्यक पड़ी |इन सभी को ममता व उनकी टीम ने ग्रामीण ई-स्टोर के लिए प्रशिक्षित किया ।जिससे उन्हें रोजगार करने में सहायता मिलेऔर फायदा भी हो।

पीएमजीदिशा पर वीएलई ममता की मजबूत पकड़

 वीएलई ममता कहती हैं कि जब से सीएससी की शुरुआत हुई तब से ही मैं सीएससी की कई सेवाओं पर काम कर रही हूं। बकौल ममता उनका सीएससी अभी डिजिटल विलेज प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है । जहाँ पर गांव के लोगों को, किसानों व महिलाओं सभी को डिजिटल साक्षरता का महत्व समझा रही हैं। चूंकि उनके गाँव में 70 प्रतिशत आबादी अशिक्षित है। वीएलई ने बताया कि लॉकडाउन से पहले उन्हें लोगों को डिजिटल साक्षर करने मे बहुत दिक्कतों का सामना करना पडा! पर आज वही लोग डिजिटल साक्षरता के प्रति सजग हो गये हैं।  पहले गाँव के लोग मोबाईल का महत्व नहीं समझ पाते थे। उन्हें लगता फोन सिर्फ कॉल करने के लिये होता है। पर डिजिटली साक्षर होने के बाद वो डिजिटल पेमेन्ट, ऑनलाईन शॉपिंग, ऑनलाईन एजुकेशन लेने लगे । पर ये मुमकिन हुआ सिर्फ सीएससी की वजह से। सीएससी ने ममता  को मौका दिया कि वे डिजिटल विलेज के जरिये गाँव वालों को डिजिटली साक्षर करने व गाँव मे डिजिटल क्रांति लाने की मुहिम को आगे बढ़ाएं ।

आज वीएलई ममता सीएससी के जरीये ग्राऊंड लेवल पर एचडीएफसी बैंक, आधार, पीएमजीदिशा, बीसीसी, सीसीसी, बीमा, टेली मेडिसिन, सैनिटरी नैपकिन यूनिट, एलईडी बल्ब यूनिट, सीएससी ग्रामीण ई-स्टोर, डिजिटल विलेज प्रोजेक्ट, आर्थिक गणना, एलआईसी, फास्टैग, जीवन प्रमाण-पत्र, किसान सम्मान योजना आदि चला रही हैं।

 स्त्री-स्वाभिमान पर वीएलई का शानदार प्रदर्शन

 बातचीत के दौर को आगे बढाते हुए ममता ने बताया कि जब वे स्त्री स्वाभिमान अभियान से जुडी तब विषय था कि ग्रामीण क्षेत्र की बेटियों व महिलाओं तक सैनिटरी नैपकिन पहुँचाना। परन्तु हमारी भारतीय संस्कृति ऐसी थी कि ग्रामीण क्षेत्रों की बेटियों व महिलाओं से इस विषय पर बात करना गलत माना जाता था। वे इन विषयों पर बात करना पसंद नहीं करती थीं। अब मेरे मन में सवाल था कि क्या ये लोग मेरी बात सुनेंगें या नहीं। मुझे अपने ऊपर भरोसा था कि मैं इन बेटियों व महिलाओं को साफ-सफाई व गंदे कपड़े से होने वाले जोखिम के बारे में जागरुक कर सकती हूँ। वीएलई ने कहा कि मुझे ये एक तरह से सेवा का कार्य लगा। इसी संबध में सीएससी की टीम ने मेरा काफी मार्गदर्शन किया।

 वीएलई ने स्कूल, कॉलेज व ग्रामीण आदिवासी क्षेत्रों की महिलाओं में एक लाख से अधिक मुफ्त सैनिटरी नैपकिन बांटे व स्कूल, कॉलेज व रेलवे स्टेशन पर पेडिंग मशीनें लगवाई। ग्रामीण क्षेत्रों में जागरुकता कार्यक्रम चलाएं, समाज के हर तबके तक सैनिटरी नैपकिन की जानकारी व उससे होने वाले फायदों के लिए शार्ट फिल्म भी बनाई। जिससे ग्रामीण बेटियों व महिलाओं को समझने में ज्यादा असुविधा नहीं हुई। ममता की मेहनत रंग लाई और आज 70 प्रतिशत महिलाएं निसंकोच इस विषय पर चर्चा करती हैं।

 ममता के इस सराहनीय काम को देखते हुए भद्रावती ने “भद्रावती भूषण”सम्मान से उन्हे सम्मानित किया। सीएससी के कारण आज ममता समाज में अपना योगदान दे पायीं जिसकी उन्हें बहुत खुशी है। सैनिटरी नैपकिन यूनिट लगाने से ममता ने 10 महिलाओं को रोजगार भी दिलाया है।

स्त्री स्वाभिमान का कार्य मेरे जीवन में सबसे महत्वपूर्ण रहा क्योंकि माननीय रवि शंकर प्रसाद जी ने ट्वीट करके मेरे काम को सराहा व मुझे सम्मानित किया जिससे मेरा मनोबल बढा।
महारष्ट्र के चंद्रपुर से डिजिटल विलेज घोड़पेठ से वीएलई ममता सारडा की भावी योजनाएं उनके शब्दो मे “ हमारी इन सभी योजनाओं का पुनर्मूल्यांकन कर हमें सूचित करें, ताकि हम उन योजनाओं का लाभ किसान एवं जनता तक पहुचां सके। सीएससी द्वारा चलाये जा रहे कार्यक्रम ग्रामीण स्तर पर अधिक लाभकारी सिद्ध होंगे और आम जनता सरकार की योजनाओं का लाभ उठाएगी।

फिरसे एक बार मैं सीएससी के एमडी- श्री दिनेश त्यागी सर और सीएससी टीम का धन्यवाद देना चाहती हूं कि मुझे अपने पाँव पर खडा होने की हिम्मत दी और आज मै अपने आप को सफल सीएससी वीएलई के रुप में देख पाती हूँ ।

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